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সোমবার, নভেম্বর 29, 2021

अष्टम स्वरूप मां दुर्गा महागौरी बीज मंत्र, कवच और स्रोत ।।

मां महागौरी बीज मंत्र

श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम

 

 

 

मां महागौरी स्तोत्र

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।

ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

 

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।

डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

 

त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।

वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

 

 

मां महागौरी कवच ।।

 

 

ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, ह्रदयो। क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥

ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो। कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

 

माँ गौरी की पूजा हेतु रामचरितमानस की चौपाई।।

 

मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली।तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

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